
जंगली हाथियों के आतंक से कालागढ़ के किसान बेहाल, खेतों में घुसकर करीब छह बीघा गन्ने की फसल को रौंद डाला।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
कालागढ़। कालागढ़ क्षेत्र में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से किसान परेशान और बेहाल हैं। वन्यजीवों से फसल बचाने के लिए किसानों की ओर से खेतों में फेंसिंग तक की गई है, लेकिन इसके बावजूद हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। बुधवार रात हाथियों के झुंड ने किसानों के खेतों में जमकर उत्पात मचाया और करीब छह बीघा गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा दिया।
बताया गया कि कालागढ़ के समीप बुधवार रात हाथियों का एक झुंड किसान शमशुद्दीन अंसारी, भीम सिंह और मूला सिंह के खेतों में जा घुसा। किसानों ने फसल की सुरक्षा के लिए खेतों के चारों ओर फेंसिंग कर रखी थी, लेकिन हाथियों ने उसे भी नहीं माना। शोर मचाने के बावजूद हाथी काफी देर तक खेतों में डटे रहे।
सबसे पहले हाथियों ने शमशुद्दीन अंसारी के खेत में पहुंचकर लिप्टिस के पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया। हाथियों के धक्के से कई पेड़ फेंसिंग पर गिर गए, जिससे फेंसिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद हाथियों का झुंड भीम सिंह के खेत में पहुंचा और करीब तीन बीघा गन्ने की खड़ी फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया।
इसके बाद हाथियों ने मूला सिंह के खेत का रुख किया। यहां भी करीब तीन बीघा गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया गया। रातभर किसान अपनी आंखों के सामने मेहनत से तैयार की गई फसल को बर्बाद होते देखने को मजबूर रहे।
किसानों का कहना है कि वन्यजीवों से फसल बचाने के लिए लगातार वन विभाग से गुहार लगाई जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। किसानों का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर वन विभाग के पास जाते हैं तो अक्सर सीमा क्षेत्र का हवाला दिया जाता है। ऐसे में किसान आखिर अपनी फसल और आजीविका की रक्षा कैसे करें।
किसानों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पहले से ही खेती करना मुश्किल होता जा रहा है और अब जंगली हाथियों के लगातार खेतों में पहुंचने से उनकी मेहनत और आजीविका दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।







