कॉर्बेट की सफारी पर नया विवाद, करंट परमिट खत्म करने की तैयारी के खिलाफ जिप्सी स्वामियों का बड़ा ऐलान।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की करंट परमिट व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय जिप्सी स्वामियों और अन्य हितधारकों ने पार्क प्रशासन को साफ संदेश देते हुए करंट परमिट व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह व्यवस्था बंद की गई तो सैकड़ों स्थानीय परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा।
स्थानीय जिप्सी स्वामियों का आरोप है कि कुछ लोगों के दबाव में करंट परमिट व्यवस्था खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वर्षों से यह व्यवस्था स्थानीय रोजगार का महत्वपूर्ण आधार रही है। उनका कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग की समय-सीमा समाप्त होने के बाद करंट परमिट जारी रहने से पर्यटकों को भी सुविधा मिलती है और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है।
हितधारकों ने पार्क प्रशासन से मांग की है कि किसी एक वर्ग के हित में फैसला लेने के बजाय सभी पक्षों को समान अवसर दिया जाए। यदि करंट परमिट व्यवस्था को जारी रखना संभव नहीं है, तो पूरी रोटेशन प्रणाली लागू की जाए और रिजर्व फॉरेस्ट के पंजीकृत वाहनों को भी कॉर्बेट के जोनों में संचालन का समान अधिकार मिले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी का विरोध करना नहीं, बल्कि रोजगार की सुरक्षा, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करना है। अब सभी की निगाहें पार्क प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि कॉर्बेट में रोजगार और पर्यटन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।
आउट्रो:
करंट परमिट को लेकर उठी इस नई बहस ने कॉर्बेट के पर्यटन तंत्र में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि पार्क प्रशासन स्थानीय हितों और पर्यटन व्यवस्था के बीच किस तरह का संतुलित फैसला लेता है।




