न्याय व्यवस्था को आधुनिक और जनसुलभ बनाने में ‘जूडिशियम 2.0’ की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री धामी

ख़बर शेयर करें -

न्याय व्यवस्था को आधुनिक और जनसुलभ बनाने में ‘जूडिशियम 2.0’ की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री धामी

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

देहरादून।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाना सुशासन की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग तक त्वरित और निष्पक्ष न्याय पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

 

 

सोमवार को यू.पी.ई.एस. बिधौली में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन ‘जूडिशियम 2.0 – इंक्लूजन, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन की थीम न्याय तक आसान पहुंच, समावेशिता और न्यायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है, जो विकसित भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है।

यह भी पढ़ें 👉  मां के नाम एक पेड़: कॉर्बेट में शुरू हुआ पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान 🌳🌿

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक सरल और सुलभ न्याय पहुंचाना बेहद जरूरी है। न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है। न्याय में अनावश्यक देरी से आमजन का विश्वास प्रभावित होता है, इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉  जंगल में खनन माफिया की एंट्री, वन विभाग ने बीच रास्ते दबोचा ट्रैक्टर!

 

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून, दंगा रोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई से कानून के शासन को मजबूती मिली है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को महिला सशक्तिकरण और समान न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखण्ड की पूर्व चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक मॉडल ने खींचा श्रीलंका का ध्यान

 

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 5 करोड़ रुपये की धनराशि देने की घोषणा की और एसोसिएशन की स्मारिका का विमोचन भी किया।

 

 

 

सम्मेलन में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह सहित न्यायिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।