रामनगर अस्पताल की बदहाली पर जनआक्रोश, संयुक्त संघर्ष समिति ने फूंका आंदोलन का बिगुल।

रामनगर अस्पताल की बदहाली पर जनआक्रोश, संयुक्त संघर्ष समिति ने फूंका आंदोलन का बिगुल।

रामनगर अस्पताल की बदहाली पर जनआक्रोश, संयुक्त संघर्ष समिति ने फूंका आंदोलन का बिगुल।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर। रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है। लखनपुर से शुरू हुए इस अभियान के तहत नुक्कड़ सभाओं, पर्चा वितरण और हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अस्पताल की समस्याओं को लेकर जनता को जागरूक किया जा रहा है। आंदोलन को नगर पालिका के वार्ड नंबर 1, 3 और 20 के सभासद नवीन सुनेजा, सचिन कुमार और एडवोकेट विक्रम भट्ट ने भी समर्थन दिया है।

 

 

संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से लखनपुर सब्जी मंडी चौराहे पर नुक्कड़ सभा आयोजित कर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। सभा का संचालन राज्य आंदोलनकारी एवं उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने किया। वक्ताओं ने अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति, सीटी स्कैन, आईसीयू, वेंटिलेटर की सुविधा, सभी प्रकार की जांचों की उपलब्धता तथा ब्लड बैंक को सुचारु रूप से संचालित करने की मांग उठाई।

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सभा को उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप, सभासद नवीन सुनेजा, सचिन कुमार, एडवोकेट विक्रम भट्ट, समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के भुवन और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्बाल सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

 

 

 

रेफरल के चक्कर में मरीजों की जान पर संकट

वक्ताओं ने अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर के साथ ही कुमाऊं और गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र है। पहाड़ी इलाकों से गंभीर मरीज यहां उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन आवश्यक विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे उपचार में देरी होती है और कई बार मरीजों की जान पर संकट खड़ा हो जाता है।

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समिति के सदस्यों ने कहा कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी, स्थानीय विधायक, सांसद, स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री तक कई बार मांगें पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

 

 

 

4 नवंबर तक अल्टीमेटम, 5 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन

संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 4 नवंबर 2026 तक अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया, तो विधायक, सांसद और मंत्रियों का घेराव किया जाएगा। इसके बाद 5 नवंबर को धरना-प्रदर्शन कर सैकड़ों नागरिकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन उपजिलाधिकारी रामनगर के माध्यम से शासन-प्रशासन को भेजा जाएगा।

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समिति के सदस्य प्रभात ध्यानी ने बताया कि आने वाले दिनों में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में नुक्कड़ सभाओं तथा हस्ताक्षर अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा। इसके साथ ही नगर पालिका सभासदों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, नगर पालिका अध्यक्ष और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों से आंदोलन में सहयोग देने की अपील की जाएगी।

इस अवसर पर गिरिश चंद्र आर्य, आसिफ, जमन, रवि, वी.डी. नैनवाल सहित संघर्ष समिति के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।