

ज्योलीकोट में पीलिया के बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, निदेशक ने जारी किए 9 सूत्रीय निर्देश।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
नैनीताल, 11 सितंबर 2026। ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया एवं जलजनित रोगों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था तेज कर दी है। निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कुमाऊं मंडल डॉ. केके अग्रवाल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल एवं संयुक्त निदेशक डॉ. योगेश चंद्र पुरोहित के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टाइप-ए ज्योलीकोट तथा पीलिया प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेते हुए निदेशक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और पीएचसी ज्योलीकोट के चिकित्सा अधिकारी को पीलिया एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों को उच्च, मध्यम और निम्न जोखिम श्रेणियों में विभाजित कर उसी के अनुसार कार्रवाई करने को कहा।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सघन निगरानी के साथ पेयजल के नमूनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कराने, मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों में नियमित अनुश्रवण एवं स्वास्थ्य परीक्षण तथा निम्न जोखिम वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए।
निदेशक ने सभी पेयजल स्रोतों के क्लोरीनीकरण के लिए स्थानीय लोगों को जागरूक करने तथा दूषित पानी और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियां संचालित करने को कहा। लोगों को पानी को कम से कम 15 मिनट तक उबालकर ठंडा करने के बाद पीने, साबुन से हाथ धोने और घरों के आसपास जलजमाव न होने देने के लिए जागरूक किया जाएगा।
रैपिड रिस्पॉन्स टीम रहेगी अलर्ट
जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर गठित रैपिड रिस्पॉन्स टीम/जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (RRT/DIORT) को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी क्षेत्र में पीलिया के मामलों का क्लस्टर सामने आने पर महामारी विशेषज्ञ, चिकित्सक एवं पैथोलॉजिस्ट की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर निरोधात्मक एवं उपचारात्मक कार्रवाई करेगी।
सभी पीलिया प्रभावित मरीजों की अनिवार्य रूप से लाइन-लिस्टिंग करने तथा नए और पुराने मरीजों का अलग-अलग व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य इकाइयों को मरीजों की सूचना IHIP-IDSP पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज करनी होगी। मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि अथवा मृत्यु होने पर नियमानुसार डेथ ऑडिट भी कराया जाएगा।
अस्पतालों में बनेगी विशेष क्लिनिक/डेस्क
संबंधित चिकित्सालयों में पीलिया एवं लिवर संबंधी रोगों की त्वरित जांच और उपचार के लिए विशेष क्लिनिक अथवा डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्लिनिकों से प्रतिदिन निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट निदेशक कार्यालय एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को भेजी जाएगी।
पीएचसी एवं संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में ORS, बी-कॉम्प्लेक्स, मल्टीविटामिन, IV फ्लूड्स, लिवटोनिक, हेपामर्ज आदि जीवन रक्षक एवं सहायक औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी परिस्थिति में दवाओं की कमी न हो।
पेयजल स्रोतों की होगी नियमित जांच
जल संस्थान के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित क्षेत्रों के प्रमुख पेयजल स्रोतों की नियमित वाटर सैंपलिंग एवं प्रयोगशाला जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। पेयजल आपूर्ति से पहले निर्धारित मानकों के अनुसार सुपरक्लोरीनेशन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही नगर निगम, पंचायती राज एवं ग्राम विकास समितियों के सहयोग से प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई और स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा।
निदेशक ने हल्द्वानी क्षेत्र के सभी निजी चिकित्सालयों एवं क्लीनिकों में भी पीलिया और जलजनित रोगों की निगरानी बढ़ाने तथा सभी मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को संक्रमण की रोकथाम के लिए अब तक किए गए उपायों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा गया है। वहीं जल संस्थान के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता, नियमित क्लोरीनीकरण, त्रि-स्तरीय जोनल वर्गीकरण, सैंपलिंग और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।



















