
रामायण के आदर्शों से ही बनेगा संस्कारवान समाज: तारा घिल्डियाल।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। नेकी की दीवार के संयोजक तारा घिल्डियाल ने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, आदर्श नेतृत्व, पारिवारिक संबंधों और मानवीय मूल्यों की अनुपम पाठशाला है। वर्तमान समय में रामायण की शिक्षाएं समाज में नैतिकता, संवेदनशीलता, सद्भाव और कर्तव्यनिष्ठा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि रामायण का प्रत्येक चरित्र हमें जीवन की महत्वपूर्ण सीख देता है। प्रभु श्रीराम मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा, माता सीता आत्मसम्मान और धैर्य, लक्ष्मण समर्पण, भरत त्याग तथा हनुमान जी निःस्वार्थ सेवा और विनम्रता की प्रेरणा देते हैं। वहीं, रावण का चरित्र बताता है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बन सकता है।
तारा घिल्डियाल ने कहा कि रामायण का वास्तविक उद्देश्य केवल उसका पाठ करना नहीं, बल्कि उसकी शिक्षाओं को अपने आचरण में उतारना है। यदि व्यक्ति राम की मर्यादा, भरत के त्याग, हनुमान जी की सेवाभावना और माता सीता के आत्मसम्मान को अपने जीवन में अपनाए, तो परिवारों में प्रेम, समाज में सद्भाव और राष्ट्र में नैतिक चेतना को मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे रामायण को आस्था के साथ-साथ जीवन प्रबंधन, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी के मार्गदर्शक के रूप में भी पढ़ें। उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन केवल उपदेश देने से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों से आता है।
नेकी की दीवार का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म का सार मानवता की सेवा, कमजोरों का सहारा बनना, जरूरतमंदों की मदद करना तथा समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना है। रामायण की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर ही संवेदनशील, संस्कारवान और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है।
इस अवसर पर अध्यक्ष गिरीश मठपाल, उपाध्यक्ष विनीत रिखाड़ी, महाप्रबंधक दिनेश सत्यवली, प्रबंधक अमित लोहनी, मंत्री दीप जोशी, उपमंत्री नवीन करगेती, कोषाध्यक्ष मोहन बिष्ट सहित कार्यकारिणी सदस्य हेम चन्द्र पाण्डे, पूरन चन्द्र पाण्डे, वीरेन्द्र पाण्डे, अनुज मिश्रा, ललित रावत, भानु करगेती और करन आर्या सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।







