
हिमालय संरक्षण से पहाड़ी खान-पान तक, कॉर्बेट लिट फेस्ट में गूंजा प्रकृति बचाने का संदेश।
दूसरे दिन पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति पर हुआ मंथन, ‘Birds of Corbett’ पुस्तक का विमोचन।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। कॉर्बेट की धरती पर आयोजित तीन दिवसीय कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026 के दूसरे दिन बुधवार को साहित्य के साथ पर्यावरण, हिमालय, जैव विविधता, स्थानीय खान-पान और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर गंभीर मंथन हुआ। देश-विदेश से पहुंचे पर्यावरणविदों, भूगोलवेत्ताओं, वन्यजीव विशेषज्ञों और साहित्यकारों ने हिमालय की संवेदनशीलता तथा इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विचार साझा किए।
तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालय महज बर्फ और पत्थरों का क्षेत्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा और विश्व के महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने तथा जैव विविधता बचाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया।
महोत्सव के एक विशेष सत्र में उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी खान-पान, कृषि और जीवनशैली पर चर्चा हुई। झंगोरा, कौणी, मडुआ, गहत और भट्ट की दाल जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों के पौष्टिक महत्व और पारंपरिक पकाने की विधियों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ी खान-पान और जैविक खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार और रिवर्स माइग्रेशन को गति दी जा सकती है।
‘Birds of Corbett’ पुस्तक का विमोचन
महोत्सव के दौरान ‘Birds of Corbett’ पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। पुस्तक के लेखक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला, आईएफएस और जेआरएफ मोहम्मद आरिफ अंसारी हैं। युवा पाठकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस पुस्तक में रंगीन चित्रों और सरल भाषा के माध्यम से कॉर्बेट के पक्षियों की विविध दुनिया को प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं में पक्षियों, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिज्ञासा एवं संवेदनशीलता विकसित करना है।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने कहा कि कॉर्बेट साहित्य महोत्सव साहित्य, प्रकृति, वन्यजीवन, संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों को कॉर्बेट की जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर छात्रों ने रखे विचार
उधर, वन्यप्राणी सप्ताह-2026 के तहत कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र कालागढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने संघर्ष के कारणों, प्रभावों और समाधान के उपायों पर अपने विचार रखे। शाम को वन विश्राम भवन रामनगर में स्कूली बच्चों ने प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसके बाद कठपुतली कार्यक्रम के जरिए मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, डॉ. प्रेरणा बिंद्रा, डॉ. पुष्पेश पंत और अनूप शाह सहित राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव लेखक, फोटोग्राफर, पर्यावरणविद, पक्षी विशेषज्ञ, साहित्यकार, पत्रकार और स्थानीय हितधारक मौजूद रहे।







